Thursday, 2 May 2013

क्यों वीर हो रोध में


क्या हो रहा राष्ट्र में देख लो लोग आते नहीं क्यों कभी क्रोध में
क्यों भूल के दिव्य आर्यत्व को हैं लगे व्यर्थ के आसुरी शोध में
हुँकारती भूमि जो थी सदा आज क्यों तुष्ट है शान्ति के बोध में
पन्थी बनो वीरता पन्थ के नष्ट हो शत्रु क्यों वीर हो रोध में
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

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