Sunday, 12 May 2013

तू समर्थ है


1
जान 'प' से है पवित्र 'र' से रचना करे जो', शु' से शुभता लिए परशु का ये अर्थ है
'रा' से राजनैतिक और 'म' से मर्यादायुक्त राम को न जाने यदि जीवन ही व्यर्थ है
विप्रवंश नायक ने जो दिखाया मार्ग श्रेष्ठ, देख, जाग विप्र आज हो रहा अनर्थ है
ले  उठा ध्वजा सनातनी संभाल राजनीति श्रेष्ठ कार्य हेतु एकमात्र तू समर्थ है
2
शूकरों का परिवार करे उर पे प्रहार कहे खाते विष्ठा भारती को भी खिलाएंगे
माँ बहन अपनी भी रखते रखैल सदा 'वन्दे मातरम' वाला गान नहीं गायेंगे
क्लीव सांसदों से हमे कोई अब आस  नहीं जागे हम पुत्र भारती के हैं बताएँगे
भूल गया गुजरात द्रोहियों का है समाज पूर्ण राष्ट्र में सुकृत्य वही दोहराएंगे
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

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