Friday, 10 May 2013

क्यों न अभीष्ट दिया


घोर दयामय हो प्रभु जी  नृप तुल्य कृपावश भृत्य किया
अज्ञ सुविज्ञ बना तुमने प्रतिभा हर दे कृतकृत्य किया
पंगु बना तब श्रृंगजयी हर शैल धरा पर नृत्य किया
क्यों न अभीष्ट दिया मुझको तव ध्यान धरा श्रम नित्य किया
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

2 comments:

  1. क्यों न अभीष्ट दिया मुझको तव ध्यान धरा श्रम नित्य किया

    ---- क्या बाजपाई जी अपने श्रम का ईश्वर से मूल्य प्राप्त करना चाहते हैं...

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  2. nahi mitra maang rahaa hoon uski samrthya smaran kar ke

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