Monday, 29 April 2013

स्वाभिमान जा रहा



एक क्लीव को बना दिया है देश का प्रधान देख निर्विरोध बढ़ा शत्रु चला आ रहा
या कि पहुँचा दिया गया है ढेर अर्थ उसे चीन का बना दलाल शत्रु को बुला रहा
आ गया है वक्त मातृभूमि के ऋणों से मुक्ति का प्रयास हो कि काल वीर को जगा रहा
भारतीय भूमि का सुवक्ष रौंदता है चीन जाग वीर युद्ध छेड़ स्वाभिमान जा रहा
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

4 comments:

  1. आज देश को इसी तरह के आहवाहन की आवश्यकता है। बहुत सुन्दर! बधाई स्वीकारें इस सुन्दर रचना के लिए।

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  2. एक चीज मुझे अच्छी लगी आपके ब्लाॅग पर कि आपने सदस्यता या अनुसरण करने के लिए कोई आग्रह नहीं किया है। यह आपके आत्मबल का परिचायक है। साधुवाद इसके लिए।
    एक निवेदन कि टिप्पणी से वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) हटा दीजिए। इससे टिप्पणी करने वालों को कठिनाई होती है।
    सादर!

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  3. आपकी यह सुन्दर रचना निर्झर टाइम्स (http://nirjhar-times.blogspot.com) पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें और अपने सुझाव दें।

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