Friday, 12 April 2013

वर दे दो


यज्ञ बढ़े सुर शक्ति बढ़े तुम वेद ऋचा स्वर में भर दे दो
गौ द्विज भू करते अति पीड़ित जो उनके उर में डर दे दो
द्रोह करें जन दण्ड उन्हें स्वयमेव सुनो तुम आकर दे दो
हे चतुरानन जाय प्रणाम तुम्हे मुझको इतना वर दे दो
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

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