Monday, 15 April 2013

नारि सशक्त बनी


हर नारि सशक्त बनी इससे परचिन्तन देख नहीं करती
अब नेह सुमूर्ति नहीं लगती निज की वह तुष्टि सदा वरती
शिशु जन्म दिया पर वक्ष लगा अभिसिञ्चित दुग्ध नहीं भरती
तन सौष्ठव का नित ध्यान यहाँ वह आज अतीव सुनो धरती

रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
लखनऊ

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