Sunday, 9 June 2013

त्रिलोक व्याप लेंगे हम

कैसा भी तिमिर हो अमावसी प्रभाव लिए निश्चित है गहराई पूरी माप लेंगे हम
ज्ञानवान हो सकेगा एक दिन कण कण ढोलक से उत्सवी सुदिव्य थाप लेंगे हम
देखना गभस्ति का प्रसार इतना करेंगे पौरुष प्रकाश से त्रिकाल नाप लेंगे हम
सत्व रज तम का बना के सन्तुलन फिर सत्य है कि पूर्ण ये त्रिलोक व्याप लेंगे हम
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ 

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