Wednesday, 12 June 2013

दायित्वों से मत भागो

तुम्हे पुकारे भारत माता उठो वीर अब तो जागो
द्रोही घाती बढे बहुत हैं दायित्वों से मत भागो

कैसा शासन लोकतन्त्र कैसी परिपाटी बोलो तो
क्या थे हम क्या हुए जा रहे निज गौरव को तोलो तो
वीर शिवा राणा झाला की मातृभूमि सिसकी भरती
चक्र सुदर्शन हाथ धरो अवरुद्ध मार्ग को खोलो तो

तप का जीवन सदा श्रेष्ठ है उसे न किंचित भी त्यागो
द्रोही घाती बढे बहुत हैं दायित्वों से मत भागो

छोड़ पराक्रम काम अश्व को ढीला ढाला छोड़ दिया
क्यों लैला मँजनू शीरी फरहादों से मन युक्त किया
लव कुश अर्जुन भीम कर्ण की क्यों तुमको है याद नहीं
काले बालों गोरे गालों ने पौरुष क्यों लूट लिया

कवच ढाल का ही विष्टर हो अब गद्दों को मत तागो
द्रोही घाती बढे बहुत हैं दायित्वों से मत भागो

देखो शैलराज घायल हैं घायल पडी भारती हैं
फिर भी अपनी ममता तुम पर देखो नित्य वारती हैं
काल आ गया उस ममता का वीलों मोल चुका दो तुम
यही तुम्हारी श्रद्धा होगी यही सहस्त्र आरती हैं

कुण्ड प्रज्ज्वलित करो रक्त की अर्पित कर दो हवि यागो
द्रोही घाती बढे बहुत हैं दायित्वों से मत भागो

तुम्हे पुकारे भारत माता उठो वीर अब तो जागो
द्रोही घाती बढे बहुत हैं दायित्वों से मत भागो
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ 

2 comments:

  1. DR ASHUTOSH JI AAPKI RACHNAYE TO JEEVAN MAY SANJEEVANI KI TARAH KARGAR HAI AAPKA BAHUT BAHUT ABHINANDAN OUR VANDAN KARTA HU

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