Monday, 3 June 2013

जीवन बदल गया

देखते ही देखते ये जीवन बदल गया, और बदला है मम राष्ट्र परिवेश भी 
कोई चीर से विहीन करता सरस्वती को, कोई खींचने लगा है जननी के केश भी 
आँधियाँ चली हैं द्रोह की समग्र विश्व आज, घोर तम से घिरे हैं देख लो दिनेश भी 
शक्तिहीन से लगें सनातनी समस्त देव, और अपशब्द झेलते हुए महेश भी 
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

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