Wednesday, 19 June 2013

नेह सुधा छलके

सिंहावलोकन में दुर्मिल सवैया---

छलके ममता जब आँचल से शुचि काव्य प्रसाद तभी झलके
झलके उर भक्ति सुनो प्रिय माँ जब छन्द प्रबन्ध न हों हलके
हलके हलके मुंदतीं पलकें रसपान करें तव सम्बल के
बल के न कठोर प्रयोग बढें वर दो बस नेह सुधा छलके
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ 

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