Tuesday, 1 April 2014

दुलरा दुलरा

भर अंक मुझे सम शैशव जागृत माँ मम आज किलोल करो
अवसाद हरो व भरो उर हर्ष व मन्त्र सभी मम बोल करो
दुलरा दुलरा पुचकार व चुम्बन ले मम लाल कपोल करो
जगदम्ब! प्रदर्शित लाड़ सुपुत्र निमित्त अभी मन खोल करो
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ 

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