Tuesday, 30 April 2013

हरि राम कहो हरि कृष्ण कहो


सुन वृक्ष रहा जितना जग में अति प्राच्य वही तन ताप हरे
यदि माँ पितु को वय दान मिले तब जान कि ईश्वर पाप हरे
पर स्वार्थ भरा मन त्याग चला जनकों तक को सुख आप हरे
हरि राम कहो हरि कृष्ण कहो कलिकाल प्रभाव सुजाप हरे
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

Monday, 29 April 2013

स्वाभिमान जा रहा



एक क्लीव को बना दिया है देश का प्रधान देख निर्विरोध बढ़ा शत्रु चला आ रहा
या कि पहुँचा दिया गया है ढेर अर्थ उसे चीन का बना दलाल शत्रु को बुला रहा
आ गया है वक्त मातृभूमि के ऋणों से मुक्ति का प्रयास हो कि काल वीर को जगा रहा
भारतीय भूमि का सुवक्ष रौंदता है चीन जाग वीर युद्ध छेड़ स्वाभिमान जा रहा
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

Sunday, 28 April 2013

पूर्ण चीन भारती का हो गया


चीन की घुस पैठ पर दो घनाक्षरी....स्नेह का आकांक्षी हूँ

मूर्ख क्या प्रधान देश का कि दे रहा बयान' दो न ध्यान ताल ठोंक चीन जो खड़ा हुआ
त्याग दो समस्त आन बान शान स्वाभिमान, अर्थ तो यही, स्वराष्ट्र लाज से गड़ा हुआ
राष्ट्र द्रोह के प्रमाण और भी मिले अनेक, किन्तु द्रोह साम्य अन्य भी कभी बड़ा हुआ
रक्त खौलने लगा, अपार क्रुद्ध देश आज, शत्रु शीश काट क्यों न फैसला कड़ा हुआ

भारतीय राजनीति का चरित्र देख आज चीन का प्रवेश राष्ट्र स्वाभिमान धो गया
लूटती चली गई हमें कुनीति और मित्र भारतीय आर्यवीर शक्ति भूल सो गया
जाग बगलामुखी जगा स्वदेश रक्त अम्ब खोज धूमावती राष्ट्र भाव कहाँ खो गया
धार के सहस्त्र हाथ में सहस्त्र ब्रह्म अस्त्र घोष हो कि पूर्ण चीन भारती का हो गया
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य, लखनऊ

Thursday, 25 April 2013

बोलो बजरंगबली


हनुमान जयन्ती पर सभी को शुभ कामनाएँ

शंकर सुवन केसरी के आप नन्दन हो अञ्जनि सपूत प्रभु राम जी के प्यारे हो
धर्म रक्षणार्थ भूमि पर हो शरीर धारे कलि में प्रभावी सन्तमात्र के सहारे हो
दे दो सिद्धियाँ समस्त निधियाँ प्रदान करो बोलो बजरंगबली क्यों हमें बिसारे हो
दास रघुनाथ के हो सत्य है परन्तु सत्य यह भी कि नाथ प्रभु आप ही हमारे हो

रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

आज अलंकृत आँगन है


देखिये श्रृंगार में अलंकार का चमत्कार

मन मीत मिला मनमोहक मादक मस्त महा मनभावन है
उजला उपवस्त्र उपासक सा उसका उपमान उषार्चन है
नख नैन निखार निहार कि नूपुर का नभ में नवनर्तन है
अब अम्बर अम्बुद आप्त अलौकिक आज अलंकृत आँगन है
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

Wednesday, 24 April 2013

सुपुष्प भी खिला नहीं


मै कहाँ कहाँ नहीं गया स्वधर्म रक्षणार्थ किन्तु एक भी सहायतार्थ है मिला नहीं
राष्ट्र का प्रसून दिव्य आज कुम्हला रहा परन्तु स्वार्थ वृत्ति से मनुष्य भी हिला नहीं
ये ध्वजा त्रिवर्ण स्वाभिमान हीन हो अपार जीर्ण शीर्ण सी प्रतीत हो इसे सिला नहीं
आसुरी प्रसार से अधर्म से महान कष्ट पा रही धरा यहाँ सुपुष्प भी खिला नहीं
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
लखनऊ

Tuesday, 23 April 2013

बहाओ माँ


दौड़ आओ अम्ब व्यग्र हो रहा अतीव चित्त अंक में उठाओ आज वक्ष से लगाओ माँ
आ रहे नहीं विचार भी नवीन बुद्धि में कि शब्द रूप धार लेखनी में बैठ जाओ माँ
दो शिवत्व शक्ति दास को करो कृतार्थ नित्य लेखनी चले अभी विपंचिका बजाओ माँ
हस्तबद्ध प्रार्थना सुनो तुरन्त दास हेतु दिव्य दो प्रसाद धार काव्य की बहाओ माँ
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
लखनऊ