Wednesday, 19 June 2013

जानते थे ये रहस्य

वीर्य नाश में निमग्न मानवीयता है भग्न किंचित महत्त्व भी मिले न शुद्ध नेह को
यौवन अपार शक्तियुक्त किन्तु काम नित्य, क्षीण ही करे समग्र मानवीय देह को
आर्य ये रहस्य जान हुए बड़े मेधावान धार ब्रह्मचर्य कहें सेव्य अवलेह को
कारण यही था तब जीवन सहस्त्र वर्ष आज मिलता नहीं शतायु किसी गेह को
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ 

Sunday, 16 June 2013

सनातनी प्रभाव छलके

एक सिंहावलोकन छन्द

छलके ममत्व पुत्र को मिले कवित्व शक्ति, शारदे! प्रसाद रूप छन्द मिलें ढल के
ढल के न सूर्य भी प्रकाश दे, कि मृत्यु पूर्व- चाह पूर्णता मिले भले मिले मचल के
चल के तुरन्त ही समीप आओ अम्ब आप, बुद्धि मरुभूमि में प्रसून हों कमल के
मल के अनेक दिव्य लेप आत्म कोश मध्य, रोम रोम से सनातनी प्रभाव छलके
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

Thursday, 13 June 2013

सुवर्ण की लता दो माँ

अम्ब वन्दना के छन्द बनते नही हैं आज मुझसे अपार तुम रुष्ट क्यों बता दो माँ
वन्दना बिना है लेखनी भी अवरुद्ध मेरी ममता छिड़कती हो  इतना जता दो माँ
चाहता वसुन्धरा बनी रहे सनातनी ये इस हेतु धर्मराज का मुझे पता दो माँ
जागृत हों भारती के श्रेष्ठ पुत्र इस हेतु लेखनी से लिखवा सुवर्ण की लता दो माँ
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

Wednesday, 12 June 2013

भो सविता!

एक कुण्डलिया छन्द ..

सविता के हम पुत्र हैं, दिव्य हमारा तेज
पर क्षमता कम हो गई, प्रिय हमको अब सेज
प्रिय हमको अब सेज, संग भी मात्र प्रिया का
वेदशास्त्र को भूल न लेते नाम सिया का
राष्ट्र जगे इस हेतु लिखूँ मै नियमित कविता
इसमें कुछ सहयोग करो तुम भी भो सविता!
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ

दायित्वों से मत भागो

तुम्हे पुकारे भारत माता उठो वीर अब तो जागो
द्रोही घाती बढे बहुत हैं दायित्वों से मत भागो

कैसा शासन लोकतन्त्र कैसी परिपाटी बोलो तो
क्या थे हम क्या हुए जा रहे निज गौरव को तोलो तो
वीर शिवा राणा झाला की मातृभूमि सिसकी भरती
चक्र सुदर्शन हाथ धरो अवरुद्ध मार्ग को खोलो तो

तप का जीवन सदा श्रेष्ठ है उसे न किंचित भी त्यागो
द्रोही घाती बढे बहुत हैं दायित्वों से मत भागो

छोड़ पराक्रम काम अश्व को ढीला ढाला छोड़ दिया
क्यों लैला मँजनू शीरी फरहादों से मन युक्त किया
लव कुश अर्जुन भीम कर्ण की क्यों तुमको है याद नहीं
काले बालों गोरे गालों ने पौरुष क्यों लूट लिया

कवच ढाल का ही विष्टर हो अब गद्दों को मत तागो
द्रोही घाती बढे बहुत हैं दायित्वों से मत भागो

देखो शैलराज घायल हैं घायल पडी भारती हैं
फिर भी अपनी ममता तुम पर देखो नित्य वारती हैं
काल आ गया उस ममता का वीलों मोल चुका दो तुम
यही तुम्हारी श्रद्धा होगी यही सहस्त्र आरती हैं

कुण्ड प्रज्ज्वलित करो रक्त की अर्पित कर दो हवि यागो
द्रोही घाती बढे बहुत हैं दायित्वों से मत भागो

तुम्हे पुकारे भारत माता उठो वीर अब तो जागो
द्रोही घाती बढे बहुत हैं दायित्वों से मत भागो
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ 

Monday, 10 June 2013

राष्ट्रवाद कैसा हो गया

अडवानी के इस्तीफे पर  भारतवंशियों की त्वरित प्रतिक्रिया........

भारती ये राष्ट्रवाद कैसा हो गया लगता है स्वार्थवाद जैसा हो गया
मोदी देश के बने हैं ज्यो ही सम्बल
गैर दुखी और गया अपनों को खल
कैसी ये विडम्बना है दुःख के हैं पल
साथ छोड़ अडवानी कहाँ दिए चल
राष्ट्र था प्रसन्न पर्व ऐसा हो गया किन्तु घातनीति पद पैसा हो गया
भारती ये राष्ट्रवाद कैसा हो गया लगता है स्वार्थवाद जैसा हो गया
दल के पितामह हैं अब भी अटल
शरण गहो उन्ही की निकलेगा हल
अन्यथा तुम्हारा सुनो क्षीण होगा बल
फिर बोलो कैसे खिल पायेगा कमल
ये कदम यम वाला भैंसा हो गया चाहते विपक्षी जो थे वैसा हो गया
भारती ये राष्ट्रवाद कैसा हो गया लगता है स्वार्थवाद जैसा हो गया
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ 

Sunday, 9 June 2013

त्रिलोक व्याप लेंगे हम

कैसा भी तिमिर हो अमावसी प्रभाव लिए निश्चित है गहराई पूरी माप लेंगे हम
ज्ञानवान हो सकेगा एक दिन कण कण ढोलक से उत्सवी सुदिव्य थाप लेंगे हम
देखना गभस्ति का प्रसार इतना करेंगे पौरुष प्रकाश से त्रिकाल नाप लेंगे हम
सत्व रज तम का बना के सन्तुलन फिर सत्य है कि पूर्ण ये त्रिलोक व्याप लेंगे हम
रचनाकार
डॉ आशुतोष वाजपेयी
ज्योतिषाचार्य
लखनऊ